कर्नाटक के चित्रदुर्गा के रहने वाले इस परिवार के लिए कपड़ों का कारोबार शुरू करना सिर्फ एक business decision नहीं था। इसके पीछे कई सालों का सपना, परिवार का साथ और कुछ कर गुजरने का ऐसा जुनून था, जिसने रास्ते में आने वाली हर मुश्किल को छोटा कर दिया।
कुछ साल पहले परिवार के मुखिया दोहा, कतर में नौकरी करते थे। विदेश में रहते हुए उन्होंने YouTube पर Ajmera Fashion के videos देखे। धीरे-धीरे कपड़ों के कारोबार में उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई और उनके मन में एक बात तय हो गई—अगर काम करना है, तो कपड़ों का करना है और इस सफर की शुरुआत सूरत से करनी है।
उन्हें पता था कि business में मेहनत करनी पड़ेगी। नफा-नुकसान हमेशा किसी के हाथ में नहीं होता। लेकिन उन्होंने यह तय कर लिया था कि कोशिश करने से पीछे नहीं हटेंगे।
कपड़ों के कारोबार का यह सपना अचानक पैदा नहीं हुआ था। इससे पहले भी परिवार ने एक छोटी दुकान के सहारे अपना जीवन चलाया था।
चित्रदुर्गा में उनकी दुकान महज करीब 3.5 फुट चौड़ी और 5 फुट लंबी थी। जगह बहुत छोटी थी, लेकिन उसी दुकान से करीब पांच साल तक परिवार का गुजारा अच्छे से चलता रहा।
फिर परिस्थितियां बदलीं और उन्हें वह दुकान छोड़नी पड़ी।
इसके बाद वे रोजगार के लिए दोहा, कतर चले गए। वहां छोटे-मोटे काम किए, लेकिन विदेश में रहते हुए भी उनका मन अपने देश और अपने business के सपने में लगा रहा।
जब वे वापस गांव लौटे, तो उन्होंने परिवार के सामने कपड़ों का कारोबार शुरू करने की बात रखी।
परिवार उनके साथ खड़ा था। अब सिर्फ एक बड़ी समस्या बाकी थी—पूंजी।
सूरत जाना था। वहां पहुंचकर माल खरीदना था। यात्रा और शुरुआती कारोबार के लिए पैसे की जरूरत थी, लेकिन परिवार के पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी।
ऐसे समय में उनकी पत्नी ने बड़ा फैसला लिया।
उन्होंने अपने सोने के गहने बैंक में गिरवी रख दिए। इन गहनों के बदले करीब ₹3 लाख का gold loan मिला।
यही रकम उनके लिए सूरत जाने और कपड़ों के कारोबार की शुरुआत करने का आधार बनी।
लेकिन पैसे की व्यवस्था होने के बाद भी एक और मुश्किल सामने थी।
गांव से सूरत जाने के लिए ट्रेन की confirmed ticket नहीं मिल रही थी।
यह ऐसी स्थिति थी जिसमें कोई भी परिवार अपनी यात्रा कुछ समय के लिए टाल सकता था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने दो बाइक तैयार कीं।
सामान पैक किया।
और पूरे परिवार के साथ सुबह करीब 7 बजे सूरत के लिए निकल पड़े।
अब उनके सामने लगभग 2000 किलोमीटर का सफर था।
यह सिर्फ लंबी दूरी की यात्रा नहीं थी। साथ में पूरा परिवार था और रास्ते की परिस्थितियों का भी कोई भरोसा नहीं था।
कर्नाटक से सूरत तक का यह सफर करीब 15 से 16 दिनों तक चला।
रास्ते में कभी भारी बारिश ने परेशान किया तो कभी रात बिताने के लिए लॉज में रुकना पड़ा। परिवार गुलबर्गा से हैदराबाद, फिर नागपुर और अहमदाबाद होते हुए आखिरकार सूरत पहुंचा।
दो बाइक पर पूरा परिवार और सामान लेकर किया गया यह सफर आसान नहीं था।
लेकिन मंजिल साफ थी।
उन्हें सूरत पहुंचना था।
उन्हें कपड़ों का कारोबार शुरू करना था।
और उन्होंने रास्ते की परेशानी को अपने फैसले से बड़ा नहीं बनने दिया।
जब परिवार सूरत पहुंचा और अजय सर से मिला, तो उन्होंने अपने पूरे सफर की कहानी साझा की।
2000 किलोमीटर की यात्रा, ट्रेन की टिकट न मिलने के बाद बाइक से निकलना और business शुरू करने के लिए पत्नी के गहने गिरवी रखना—यह पूरी कहानी सुनकर अजय सर भी भावुक हुए।
उन्होंने परिवार के इस जुनून को सराहा और कहा कि इस भाई से जुनून के बारे में सीखने को मिला है।
उनके लिए यह भी सम्मान की बात थी कि एक परिवार सिर्फ Ajmera Fashion से जुड़ने के उद्देश्य से इतनी लंबी और कठिन यात्रा करके सूरत पहुंचा।
मुलाकात के दौरान अजय सर ने परिवार का हाथ थामा और भरोसा दिलाया कि आगे की business journey में वे अकेले नहीं हैं।
उन्हें business से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए एक विशेष support number भी उपलब्ध कराया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर वे सहायता ले सकें।
परिवार के लिए यह भरोसा महत्वपूर्ण था, क्योंकि उनके लिए सूरत आना सिर्फ खरीदारी या एक बार की यात्रा नहीं थी।
वे अपने लिए एक नया clothing business शुरू करने आए थे।
इस परिवार की कहानी को सिर्फ 2000 किलोमीटर की यात्रा के रूप में देखना शायद पूरी तस्वीर नहीं बताता।
असल बात यह है कि उन्होंने हर मुश्किल के सामने अपना तरीका बदला, लेकिन अपना लक्ष्य नहीं बदला।
पैसे की कमी थी तो पत्नी ने गहने गिरवी रखकर gold loan लिया।
ट्रेन की confirmed ticket नहीं मिली तो दो बाइक तैयार कर लीं।
रास्ते में बारिश आई तो सफर रोका नहीं, जरूरत पड़ने पर रुककर फिर आगे बढ़े।
करीब 15 से 16 दिनों की यात्रा के बाद परिवार सूरत पहुंचा।
हर मोड़ पर परिस्थितियां बदलती रहीं, लेकिन उनका फैसला नहीं बदला।
कुछ साल पहले चित्रदुर्गा में सिर्फ 3.5 फुट चौड़ी और 5 फुट लंबी दुकान के सहारे परिवार चलता था।
फिर वह दुकान छूट गई।
विदेश में नौकरी करनी पड़ी।
लेकिन कपड़ों के कारोबार का सपना खत्म नहीं हुआ।
YouTube पर Ajmera Fashion के videos देखने के बाद उस सपने को एक दिशा मिली। इसके बाद परिवार ने सिर्फ सोचने के बजाय कदम उठाया और सूरत पहुंचने का फैसला किया।
आज उनका यह सफर एक नई शुरुआत के मुकाम पर है।
इस small business story की खास बात यही है कि इसमें शुरुआत किसी बड़ी पूंजी या बड़े setup से नहीं हुई। शुरुआत हुई एक विचार से, फिर परिवार के भरोसे से और आखिर में उस विचार को सच करने के लिए उठाए गए कठिन कदमों से।
कर्नाटक से सूरत तक 2000 किलोमीटर बाइक से पहुंचना अपने आप में एक लंबी यात्रा है। लेकिन इस परिवार के लिए इसका महत्व दूरी से कहीं ज्यादा था।
इस सफर में पत्नी का त्याग था।
परिवार का साथ था।
एक नए business को लेकर विश्वास था।
और अपने फैसले से पीछे न हटने का जुनून था।
शायद यही वजह है कि इस कहानी को सिर्फ एक Ajmera Fashion customer story के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह उस परिवार की कहानी भी है जिसने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपने को मौका देने का फैसला किया।
उनके सामने रास्ते में कई बार आसान विकल्प मौजूद थे—यात्रा टाल देना, पैसे की व्यवस्था होने तक इंतजार करना या किसी और समय business शुरू करना।
लेकिन उन्होंने इनमें से कोई रास्ता नहीं चुना।
उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
ना ट्रेन की टिकट मिली, ना जेब में ज्यादा पैसे थे। फिर भी पत्नी के गहने गिरवी रखकर पूरा परिवार दो बाइक पर 2000 KM का सफर तय करके सूरत पहुंच गया।
यह जुनून ही इस कहानी की सबसे बड़ी पहचान है।
Ajmera Fashion इस परिवार के उस जज़्बे को सलाम करता है, जिसने मुश्किलों को बहाना नहीं बनने दिया और एक नए clothing business की शुरुआत के लिए इतनी लंबी यात्रा तय की।
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