बिहार के दरभंगा के रहने वाले 11वीं कक्षा के छात्र अभिषेक कुमार यादव की यह young entrepreneur story किसी सामान्य business शुरुआत की कहानी नहीं है। सड़क हादसे में पिता को खोने के बाद जिस उम्र में एक बच्चे को परिवार के सहारे की जरूरत होती है, उसी उम्र में अभिषेक ने अपनी मां और परिवार को संभालने का फैसला किया। गांव शिवनगर घाट, बेनीपुर में उसने Abhilasha Vastraalay नाम से कपड़ों की दुकान शुरू की और अपनी पढ़ाई के साथ परिवार की जिम्मेदारी उठाने की कोशिश कर रहा है।
अभिषेक का परिवार हंसता-खेलता था। घर में सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन एक दिन अचानक हुए दर्दनाक सड़क हादसे में उसके पिता का निधन हो गया।
परिवार के लिए यह ऐसा सदमा था, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी अचानक अभिषेक के सामने आ गई। वह खुद अभी 11वीं कक्षा में पढ़ रहा था। एक तरफ पिता को खोने का दुख था और दूसरी तरफ मां तथा परिवार को संभालने की चिंता।
इतनी कम उम्र में यह परिस्थिति किसी के लिए भी बेहद मुश्किल हो सकती है।
लेकिन अभिषेक ने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय कुछ करने का फैसला किया।
पिता के जाने के बाद अभिषेक ने अपने गांव शिवनगर घाट, बेनीपुर में Abhilasha Vastraalay नाम से कपड़ों की दुकान शुरू की।
उसका उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं था। वह अपने परिवार को संभालना चाहता था और अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने का रास्ता तलाश रहा था।
एक 11वीं के छात्र के लिए business शुरू करना अपने आप में बड़ी बात है। लेकिन अभिषेक ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया।
वह पढ़ाई भी कर रहा है और साथ ही अपने clothing business को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
अपनी दुकान के लिए कपड़ों का माल खरीदने अभिषेक Ajmera Fashion Surat पहुंचा।
वहां अजय सर और मशहूर YouTuber मनीष कश्यप की नजर उस पर पड़ी।
इतने बड़े लोगों के बीच इतनी कम उम्र के लड़के का मौजूद होना स्वाभाविक रूप से ध्यान खींचने वाला था। जब अजय सर ने उससे बातचीत की और उसकी कहानी सुनी, तो वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक होना मुश्किल था।
उन्हें पता चला कि यह वही बच्चा है जिसने पिता को खोने के बाद अपने परिवार को संभालने के लिए कपड़ों की दुकान शुरू की है।
अभिषेक की कहानी सुनने के बाद अजय सर ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसका हौसला बढ़ाया।
उन्होंने उसे भरोसा दिलाया कि इतनी कम उम्र में उसने जो हिम्मत दिखाई है, उसके बाद उसे अकेले इस सफर का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अजय सर ने अभिषेक को अपना personal number भी दिया और पढ़ाई से लेकर दुकान तक हर तरह की मदद का भरोसा दिया।
अभिषेक के लिए यह सिर्फ आर्थिक सहायता का विषय नहीं था। उसके लिए किसी का उसके साथ खड़ा होना और उसकी मेहनत को पहचानना भी बहुत बड़ी बात थी।
इस मुलाकात में मनीष कश्यप भी अभिषेक की कहानी से भावुक हुए।
उन्होंने अभिषेक की दुकान Abhilasha Vastraalay को अपने माध्यम से promote करने का भरोसा दिया।
अभिषेक किसी से मुफ्त में मदद मांगने नहीं आया था। वह अपना काम करना चाहता था। उसे सिर्फ अपनी मेहनत के साथ थोड़ा support और encouragement चाहिए था।
यही बात उसकी कहानी को और खास बनाती है।
दरभंगा और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अभिषेक की दुकान को support करने का एक आसान तरीका है—जब भी घर में शादी, कोई function या कपड़ों की जरूरत हो, तो Abhilasha Vastraalay को एक मौका देना।
किसी छोटे कारोबारी से खरीदारी करना सिर्फ एक transaction नहीं होता। कई बार आपकी एक खरीदारी किसी परिवार की उम्मीद को मजबूत करती है।
अभिषेक अभी बहुत छोटा है, लेकिन उसने जो जिम्मेदारी उठाई है, वह बहुत बड़ी है।
उसके सामने पिता की कमी है, परिवार की जिम्मेदारी है और साथ में अपनी पढ़ाई भी है। फिर भी उसने रुकने के बजाय अपने लिए एक रास्ता बनाने की कोशिश की है।
उसकी यह young business story यही बताती है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन जिम्मेदारी और हौसला बड़ा हो सकता है।
अभिषेक के साहस, मेहनत और अपने परिवार के लिए कुछ करने के जज़्बे को दिल से सलाम।
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